योग दिवस


योग हमारे जीवन का ही नहीँ बल्कि हमारी संस्कृति का भी एक अमोख हिस्सा है। हमारे सांस्कृतिक विद्या में योग का महत्व प्रमुख माना गया है।योग आज भी उतना ही महत्व रखता है जितना कि कई वर्ष पूर्व रखा जाता था। हालाकि हमें यह मानना पड़ेगा कि योग कि विद्या हम धीरे- धीरे भूलते जा रहे थे, हम योग के महत्व को अन्देखा करते जा रहे थे।

योग दिवस एक ऐसा दिन है, जब हम एक साथ योग को सम्मान देते हैं और उसकी गरिमा को और उजागर करते हैं।


#योग अथवा योग दिवस की शुरुआत


योग शब्द एक संस्कृत शब्द 'यूज' से आया है, जिसका अर्थ है मिलन। इसलिए योग का अर्थ है आत्मा का परमात्मा से मिलन होना।

योग शब्द का प्रयोग पहली बार रिग वेद में देखा गया है।


योग विद्या में ऋषि पतंजली ने लिखा है:


यस्मादृते न सिध्यति यज्ञो विपश्चितश्चन।

स धीनां योगमिन्वति।।


इसका अर्थ है:

योग के बिना विद्वान व्यक्ति का भी कोई यज्ञकर्म सिद्ध नहीं हो सकता है। वह योग क्या है? योग चित्तवृत्तियों का निरोध है, वह कर्तव्य कर्ममात्र में व्याप्त है।


माना जाता है कि योग विद्या का अभ्यास 5000 वर्ष पूर्व सिंधु-सरस्वती सभ्यता में शुरू हुआ था।

योग कला को समझने वाले और उसका अभ्यास करने वाले अब बहुत कम लोग बचे हैं। इस घटती प्रचलन के कारण वर्ष 2014 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी ने योग दिवस का आयोजन शुरू किया। यह दिवस हर साल 21 जून को मनाया जाता है।


#योग का महत्व

आजकल हम सब आधुनिक दौर से गुज़र रहे हैं। इसलिए हम पुरानी परंपरा व पुराने तकनीक से दूर जाते जा रहे हैं। हम पुरानी परम्पराओं का आनंद लेना और उनकी सादगी को महत्व देना भूल रहे हैं।

कई लोग योग के महत्व और शक्ति को नहीँ समझ पाते। योग हमें केवल शारीरिक नहीँ, बल्कि मानसिक रूप से भी मज़बूत बनाता है। योग अभ्यास करने वाले लोग सदा सुखी रहते हैं, जीवन में कठिनाई आने पर भी बिना डरे उसका सामना करते हैं। इतने सालों पहले बनी क्रिया को आज बड़े-बड़े वैज्ञानिक भी कारगर मानते हैं।

योग के कई फाएदे हैं। जैसे:

* शरीर और मन को शांत करता है।

* तनाव और चिंता दूर करता है।

* शरीर में लचीलापन विकसित करता है।

* मनुष्य में आत्मविश्वास बढ़ाता है।


इनके अलावा, योग बड़ी से बड़ी बीमारियाँ भी दूर करता है।


#एक संकल्प


हम आजकल हर छोटी बिमारी के लिए दवाइयाँ लेते हैं। अपने शरीर में अनेक तरह के केमिकल डालते हैं, पर फिर भी हम संतुष्ट नहीँ होते। जो बिमारियाँ दवा खाने से भी ठीक नहीँ होती उन बिमारियों को योग दूर भगा सकता है।


योग विद्या को खो देने की भूल हम नहीँ कर सकते। जिस तरह यह विद्या हमारे बीच से लुप्त होती जा रही थी, अब हमें उसे बचाना होगा। अब हमें संकल्प लेना होगा कि हम इस विद्या को कभी नष्ट न होने दें। कभी इस विद्या और इसके महत्व को भूलें नहीँ। सदा योग को सराहना हमारा कर्तव्य है, हमारी परंपरा का यह अंश सदा के लिए बना रहे इसी में हम सबकी भलाई है।


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